मुल्तवी या स्थगन प्रार्थना पत्र। Postponement Or Adjournment Application in HinDi
स्थगन प्रार्थना पत्र एक ऐसा प्रार्थना पत्र होता है जिसमें कोई पक्षकार न्यायालय से यह प्रार्थना करता है कि उसके मुकदमे की आज की कार्यवाही स्थगित कर उक्त कार्यवाही हेतु कोई अन्य तिथि नियत की जाए।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 346. कार्यवाही को मुल्तवी य स्थगित करने की शक्ति - BNSS की धारा 346 के अनुसार न्यायालय को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी वाद/मुकदमे में उक्त दिनांक की कार्यवाही को स्थगित करके उक्त कार्रवाई हेतु अन्य तिथि नियत कर सकता है।
=> परंतु कोई भी स्थगन प्रार्थना पत्र न्यायालय द्वारा तभी स्वीकार किया जाएगा जब परिस्थितियों पक्षकार के नियंत्रण से बाहर हो।
मुल्तवी या स्थगन प्रार्थना पत्र -
(3 रू)
न्यायालय श्रीमान __________________________
मु.न. सन्
सरकार बनाम Xxxx
धारा - Xxxx
थाना - Xxxxx
प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा - 346 BNSS
महोदय,
निवेदन है कि उक्त वाद में प्रार्थी (अभियुक्त/वादी/प्रतिवादी/साक्षी आदि) है। प्रार्थी की आज की तारीख वास्ते (चार्ज/बहस/जिरह/आपत्ति/जवाबदावा आदि) नियत है। किंतु प्रार्थी की अधिवक्ता निजी कार्य में व्यस्त होने के कारण (चार्ज/बहस/जिरह/आपत्ति/जवाबदावा आदि) तैयार नहीं कर सके हैं। जिस कारण आज की तारीख में (चार्ज/बहस/जिरह/आपत्ति/जवाबदावा आदि) हो पाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में प्रार्थी की आज की तारीख मुल्तवी की जानी न्यायहित में आवश्यक है।
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि प्रार्थी की आज की तारीख मुल्तवी कर वास्ते (चार्ज/बहस/जिरह/आपत्ति/जवाबदावा आदि) अन्य तिथि नियत करने की कृपा करें। श्रीमान जी की महान दया होगी।
दिनांक - Xxxxxxx प्रार्थी
Xxxxxxxxxxx
(अभियुक्त/वादी/प्रतिवादी/साक्षी आदि)
द्वारा - अधिवक्ता
मुल्तवी या स्थगन प्रार्थना पत्र का प्रारूप -
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